डिप्रेशन इंसान ज़िन्दगी को ऐसी जगह ले जाकर छोड़ देता है जहाँ ना इंसान जी पाता है, बनावटी हँसी और खुशी के साथ एक घाव लगे दिल के साथ उम्र गुज़ारने को मजबूर होता है। कोई उत्साह उमंग या तो होती ही नहीं या फिर बस पास से होकर गुज़र जाती है। डिप्रेशन या एंग्जायटी का बीमार दुनियां में सिर्फ बुरा वक्त गुज़रता है। जी नहीं पाता। डिप्रेशन, एंजाइटी, हाइपरटेंशन, अवसाद यें सब वो बीमारियां हैं जो आदमी को कहीं का नहीं छोड़ती। आदमी स्वस्थ दिखाई देता है मगर कोई नही जान सकता कि अवसाद का मरीज़ किन हालात से गुज़रता है। रात रात भर फ़ोन के बहाने जागना। बिना वजह बेकार की वीडियो देख कर वक़्त गुज़रते रहना। जब तक दिमाग़ और आँखें जवाब ना दे जाएं तब तक फ़ोन चलाना। फिर बहुत देर से सोना। सुबह बगैर किसी ऊर्जा के उठना। दिल पर काले साये के साथ उठना। कोई उमंग कोई उत्साह का ना होना। घर या काम की जगह बहुत ज़्यादा गुस्सा आना फिर घर या काम वालों को बहुत कुछ कह सुन देना। फिर पछताना। ज़िन्दगी के किसी नए काम को करने से पहले उत्साह के बजाए मायूसी और नकारात्मकता होना। बैठे बैठे सोचने की बीमारी का होना। महफ़िल में बैठे हों तो ज़हन...