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Showing posts from March, 2022

डिप्रेशन, एंग्जायटी बीमारी हैं इसे नज़रअंदाज ना करें

डिप्रेशन इंसान ज़िन्दगी को ऐसी जगह ले जाकर छोड़ देता है जहाँ ना इंसान जी पाता है, बनावटी हँसी और खुशी के साथ एक घाव लगे दिल के साथ उम्र गुज़ारने को मजबूर होता है। कोई उत्साह उमंग या तो होती ही नहीं या फिर बस पास से होकर गुज़र जाती है। डिप्रेशन या एंग्जायटी का बीमार दुनियां में सिर्फ बुरा वक्त गुज़रता है। जी नहीं पाता। डिप्रेशन, एंजाइटी, हाइपरटेंशन, अवसाद यें सब वो बीमारियां हैं जो आदमी को कहीं का नहीं छोड़ती।  आदमी स्वस्थ दिखाई देता है मगर कोई नही जान सकता कि अवसाद का मरीज़ किन हालात से गुज़रता है। रात रात भर फ़ोन के बहाने जागना। बिना वजह बेकार की वीडियो देख कर वक़्त गुज़रते रहना। जब तक दिमाग़ और आँखें जवाब ना दे जाएं तब तक फ़ोन चलाना। फिर बहुत देर से सोना। सुबह बगैर किसी ऊर्जा के उठना। दिल पर काले साये के साथ उठना। कोई उमंग कोई उत्साह का ना होना। घर या काम की जगह बहुत ज़्यादा गुस्सा आना फिर घर या काम वालों को बहुत कुछ कह सुन देना। फिर पछताना। ज़िन्दगी के किसी नए काम को करने से पहले उत्साह के बजाए मायूसी और नकारात्मकता होना। बैठे बैठे सोचने की बीमारी का होना। महफ़िल में बैठे हों तो ज़हन...

बर्रे सग़ीर जैसा कोई नहीं

काश कि इनको मौत आती! कितने बेबस है ये लोग जो मर नहीं सकते! इन्हें लोगों से ईर्ष्या होती है! लोग पैदा होते जीते है मरते है! ये लोग ना कभी पैदा होते है ना जीते हैं ना मरते है! इनके मारने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता! ये मरे हुए ही इस दुनियां में आये थे मैरे हुए ही जल जाते है दफ़न हो जाते है! यें रोटी टुकड़े को तरसते लोग, टुकड़ा मिल जाये तो छत को तरसते लोग! छत मिल जाये तो बर्तनों को तरसते लोग! बर्तन मिल जाएं तो गहनों को तरसते लोग! गहनें मिल जाएं तो रुपयों को तरसते लोग! रुपये मिल जाएं तो अरमान को तरसते लोग! अरमान मिल जाएं तो ख्वाबों को तरसते लोग! ख़्वाब मिल जाएं तो आंखों को तरसते लोग! आँखें होती नहीं मुर्दों की! मुर्दे जी नहीं सकते, कुछ कह नहीं सकते, कुछ सुन नहीं सकते! मुर्दों के दिल नही होता धड़कन नहीं होती! मुर्दों में हिर्स होती है तकब्बुर होता है! मुर्दे सड़ते हैं, झगड़ते है ! मुर्दों के दिल नहीं तो ख़ुदा कहां से आएगा? मुर्दे ख़ुदा के नाम पे झगड़ें तो झगड़ा कहां कहलायेगा? लोग दुनियां में आते है दुनियां से चले जाते है! अंधेरा देखते हैं उजालों से खिल जाते हैं! मुर्दे हज़ारों सालों से मौ...

Abid Saifi Hindustani : Shining Rising

In today's sociopolitical system where everything getting it's space by step downing other, some people still living a life for awakening the society. From an ordinary family of shamli, he has been tweeted by Rahul Gandhi, the cheif of India's oldest and longest ruled political party.  He serves the pilgrim of Kannwad Yatra. The people of Hindu religion going for Pilgrimage. This act of serving has become national unity symbol of India. The image has been shared billion on time not in India but internationally.  Cabinate Ministers of ruling state government choose him to be eligible to represent the zone. And visit his home.  Despite criticism which is a common phenomenon of society for everyone who rises, he is inspiration for many who has no back support, can rise and shine.  Today is his birthday.  Not he only but thausands are celebrating him.