Skip to main content

डिप्रेशन, एंग्जायटी बीमारी हैं इसे नज़रअंदाज ना करें

डिप्रेशन इंसान ज़िन्दगी को ऐसी जगह ले जाकर छोड़ देता है जहाँ ना इंसान जी पाता है, बनावटी हँसी और खुशी के साथ एक घाव लगे दिल के साथ उम्र गुज़ारने को मजबूर होता है। कोई उत्साह उमंग या तो होती ही नहीं या फिर बस पास से होकर गुज़र जाती है। डिप्रेशन या एंग्जायटी का बीमार दुनियां में सिर्फ बुरा वक्त गुज़रता है। जी नहीं पाता।

डिप्रेशन, एंजाइटी, हाइपरटेंशन, अवसाद यें सब वो बीमारियां हैं जो आदमी को कहीं का नहीं छोड़ती। 

आदमी स्वस्थ दिखाई देता है मगर कोई नही जान सकता कि अवसाद का मरीज़ किन हालात से गुज़रता है।

रात रात भर फ़ोन के बहाने जागना। बिना वजह बेकार की वीडियो देख कर वक़्त गुज़रते रहना। जब तक दिमाग़ और आँखें जवाब ना दे जाएं तब तक फ़ोन चलाना। फिर बहुत देर से सोना।

सुबह बगैर किसी ऊर्जा के उठना। दिल पर काले साये के साथ उठना। कोई उमंग कोई उत्साह का ना होना।

घर या काम की जगह बहुत ज़्यादा गुस्सा आना फिर घर या काम वालों को बहुत कुछ कह सुन देना। फिर पछताना।

ज़िन्दगी के किसी नए काम को करने से पहले उत्साह के बजाए मायूसी और नकारात्मकता होना।

बैठे बैठे सोचने की बीमारी का होना।

महफ़िल में बैठे हों तो ज़हन का कहीं और होना। बनावटी हँसी हँसना। 

शादी, पार्टी रिश्तेदारीयों में जाने से परहेज़ रखना और अगर चले भी जाएं तो मन का उदास ही रहना।

सब कुछ छिन जाने का डर।

हर जगह नकारात्मकता का होना।

घर से दूर जाने या कोई नया काम करने से पहले दिल मे घबराहट का होना।

दिल का डूबा रहना।

बहुत पुरानी बातें याद आना।

ख़ुद को असहज कर देने और तकलीफ पंहुचाने वाली पुरानी बातें या घटनाएं याद आना।

पुराने मकान, पुराने गली मोहल्ले जो अब बदल भी चुके हों उनमे अपने आप को घूमते खेलते महसूस करना।

ज़िन्दगी जीने की इच्छा होना मगर जी ना पाना।

दूसरों की ज़िंदगी अच्छी लगना। दूसरों क्व बारे में ये ख्याल होना की वो अपनी ज़िंदगी में कितने खुश हैं।

ये बीमारी नहीं एक दलदल है, इससे लड़िये मत 
जितना आप डिप्रेशन से लड़ोगे या इंस्पिरेशनल वीडियो देखोगे, उतना ही और ज़्यादा ये बीमारी आपको जकड़ लेगी

हर आदमी का अपने अपने कारण होते हैं, जो लोग इस बारे में बहुत गहन जानकारी रखते है सिर वही आपको इससे निकलने में मदद कर सकते है, इस मामले में तमाम तरह की पेथी फैल रही है

अगर आप भी इस बीमारी से जूझ रहे हैं तो व्हाट्सएप पर मैसेज करे

Nadeem Saifi
Educationist and counsellor
6395227834



Comments

Popular posts from this blog

ज़िन्दगी का गणित (Anti Depression Post)

तुम खुद को समझते क्या हो ? क्या तुम्हें हिसाब किताब के लिए बनाया गया है या हिसाब किताब को तुम्हारे लिए। तुम कोई भी घटना घटित ही नहीं होने दे रहे। तुम्हारा दिमाग में कुछ भी होन...

कृष्ण की बात कब समझ आती है

एक दिन में गीता अध्ययन कर रहा था। मेरे मन में पूछा,"क्या कृष्ण को जाना जा सकता है ? कोई माध्यम कोई अनुसन्धान क्या मुझे कृष्ण तक ले जा सकता है?" कृष्ण को जानने के सारे प्रयत्न विफल प्रतीत हुए तो मैने इस बात को समझ लिया कि कृषणजाने नहीं जा सकते। कृष्ण जानने का विषय नहीं हो सकते। अंतरात्मा से नई सोच का उदगम हुआ। मन ने कहा "कृष्ण को पाया जा सकता है जाना नही जा सकता " क्या कृष्ण राधा के कृष्ण है जो प्रेम की उत्कृष्ट गाथा को बुनते दिखाई पड़ते हैं या चमत्कारी कृष्ण जो राक्षसों का नाश कर देते है या वो कृष्ण जो अर्जुन के माध्यम से पूरे संसार को गीता जैसा अद्भुत ज्ञान देते है।  अक्सर पढ़ने वाले समझ बैठते हैं कि गीता को पढ़ लेने से उन्हें कृष्ण की अनुभूति हो जाती है।  जिस ने गीता पढ़ी है वो कुछ बिंदुओं पर ध्यान दें 1. गीता मनुष्य को अपने, अपने जीवन,अपनी आत्मा, सम्बंध, पूरे जीवन चक्र के हर बिन्दु के अनसुलझे प्रश्नों का पूर्ण हल देती है। 2. मनुष्य के सामने जीवन का सबसे बड़ा प्रश्नः परमात्मा से उसके सम्बन्ध का है जिसे गीता में कृष्ण बहुत ही आसानी से हल करते हैं। जब अर्जुन ...

कुत्ता

बचपन मे सुनी हुई एक रिवायत ज़हन से गुजरी जिसमे एक सहाबी (ग़ालिबन हज़रत अब्दुर्रहमान बिन ऑफ रज़ियल्लाहु अन्हु) का ज़िक्र था। रावी लिखता है कि उसने अब्दुर्रहमान को सफर के दौरान खाना खाते हुए देखा। पास में उनका कुत्ता बैठा हुआ था। खाने का अच्छा और ज़्यादातर हिस्सा आपन कुत्ते को खिला रहे थे। रावी ने इस अमल का सबब पूछा तो आपने रज़ियल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया कि अल्लाह की मख़लूक़ मुझे उम्मीदों से देख रही हो और में बेहतरीन हिस्सा खुद कहा जाऊ। ऐसा कैसे हो सकता है? सिलसिलेवार मुझे उम्र का दजला नहर के पास खड़े कुत्ते से मिसाल देकर समझाना याद आता है। फिर असहाब ए कहफ़ का कुत्ता, याहया अलैस्सलाम का कुत्ता। पता नही कौन सी दुनिया मे खो गया में। घर से निकला तो फिर सड़क से सफेद रंग का कुत्ता आकर पास खड़े हो गया और छूने की कोशिश करने लगा। में उस मासूम के बदन पर अपने आस पड़ोस के लोगों के मारे हुए ज़ख्म देख रहा था और मजबूर था कि उसको एक टुकड़ा खिला सकूं। मुझे उसे कुछ भी खिलाने के लिए अपने घर से दूर ले जाना पड़ता है ताकि कोई देख ना ले। क्योंकि कुत्तों को खाना खिलाना भी उन मेरे आस पास के लोगो के लिए मुझसे लड़ने का एक बहाना बन...