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Showing posts from 2022

Nawab Alam "a name in NEET"

"Some people become inspiration to others, their costant struggle, their target achieving hard work makes them symbol of success" Born in Kairana in an ordinary family. Qualified entrance test for admission in AMU. He passea 12th class from school of Aligarh Muslim University. then Qualified One of most toughest exam in India the "AMUEEE" and finally pursued B.Tech degree from prestigious Zakir Hussain College, AMU Aligarh. His passion for education not break here. but he appaers in one of the moat toughest exam in world "GATE" and get admission in M.Tech in world famous intitute for technical education, the IIT (Indian Institute of Technology, Guwahati) and finally got degree of M.Tech from same institution. everyone knows that after getting suchbhigh degree from IIT, one has chance to go to MNCs with high package or high salary jobs in teaching engineering in central universities. But denstiny was different. He choose yto serve public and returned t...

कृष्ण की बात कब समझ आती है

एक दिन में गीता अध्ययन कर रहा था। मेरे मन में पूछा,"क्या कृष्ण को जाना जा सकता है ? कोई माध्यम कोई अनुसन्धान क्या मुझे कृष्ण तक ले जा सकता है?" कृष्ण को जानने के सारे प्रयत्न विफल प्रतीत हुए तो मैने इस बात को समझ लिया कि कृषणजाने नहीं जा सकते। कृष्ण जानने का विषय नहीं हो सकते। अंतरात्मा से नई सोच का उदगम हुआ। मन ने कहा "कृष्ण को पाया जा सकता है जाना नही जा सकता " क्या कृष्ण राधा के कृष्ण है जो प्रेम की उत्कृष्ट गाथा को बुनते दिखाई पड़ते हैं या चमत्कारी कृष्ण जो राक्षसों का नाश कर देते है या वो कृष्ण जो अर्जुन के माध्यम से पूरे संसार को गीता जैसा अद्भुत ज्ञान देते है।  अक्सर पढ़ने वाले समझ बैठते हैं कि गीता को पढ़ लेने से उन्हें कृष्ण की अनुभूति हो जाती है।  जिस ने गीता पढ़ी है वो कुछ बिंदुओं पर ध्यान दें 1. गीता मनुष्य को अपने, अपने जीवन,अपनी आत्मा, सम्बंध, पूरे जीवन चक्र के हर बिन्दु के अनसुलझे प्रश्नों का पूर्ण हल देती है। 2. मनुष्य के सामने जीवन का सबसे बड़ा प्रश्नः परमात्मा से उसके सम्बन्ध का है जिसे गीता में कृष्ण बहुत ही आसानी से हल करते हैं। जब अर्जुन ...

NEET की तैयारी करना हुआ आसान: Pulse Academy

Nadeem Sir Ex Faculty, Bansal Tutorial NEET IIT Expert Pulse Neet Academy Yogendra Puri Muzaffarnagar Contact 6395227834 हिंदी मीडियम के स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी।। हिंदी मीडियम के वो स्टूडेंट्स जो भविष्य में एमबीबीएस करना चाहते हैं उनकी होनहार सक्षम होने के बावजूद उनका हिंदी मीडियम से होना नीट परीक्षा की तैयारी करने में बड़ी मुश्किलें पैदा करता है। मगर अब हिन्दी मीडियम से 12वीं पास करने वाले स्टूडेंट्स की ये दुविधा पल्स एकेडमी में आकर खत्म हो रही है। पल्स एकेडमी में हिंदी और इंग्लिश दोनो मीडियम के स्टूडेंट्स के लिए अलग अलग बैच की सुविधा कर दी गयी है।  एक मिथक (गलतफहमी) हिंदी मीडियम के स्टूडेंट्स से कही जाती है वो ये की अगर आप हिंदी मीडियम में तैयारी कर नीट की परीक्षा पास कर भी लेते हैं तो एमबीबीएस तो आपको इंग्लिश मीडियम में रहकर ही पढ़ना होगा ? इस दुविधा का हल ये है कि एक स्टूडेंट्स के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य नीट परीक्षा पास कर सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेना होता है। चूंकि नीट की परीक्षा हिंदी मीडियम में भी होती है इसलिए आप अगर हिंदी मीडियम से आते हैं...

कोई टाइटल नहीं बस हिम्मत चाहिए पढ़ने को

उस बस्ती में एक पागल था या सारा गाँव का गाँव पागल था  ? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए मैन कुछ दिन तक गाँव के चक्कर लगाए। उस गाँव मे मेरे कुछ परिचित भी थे जिनसे बहुत अच्छे संबंध होने की वजह से मेरे रोज़ाना आने जाने का संकोच भी आड़े नहीं आ पाया।  गाँव के अंदर मेरा आकर्षण मात्र एक ही व्यक्ति था। वो जिसे राजू कहकर पुकारा या चिढ़ाया जाता था। में उसको गांव के अलग अलग तिरस्कृत जगहों पर बैठा देखता था या फिर हाथ में पत्थर लिए लड़कों को मारते। एक तरफ लड़कों का झुंड, वो उसे कुछ अपशब्द कहते, ठहाके लगाते, फिर वो उनके पीछे पत्थर लेकर भागता, वो तितर बितर हो जाते फिर। फिर वो पत्थर फेंक कर अपना सिर खुजाता अपने जिस्म के किसी भाग को खुरचता और चला जाता। लोगों ने बताया कि छेड़ने का ये द्रश्य दिन में चार पाँच बार नित प्रतिदिन होता रहता है।  गाव के हर वर्ग के जवान हो या बच्चे पत्थर लगने के संकट के बावजूद उसको छेड़ने का रस लेने से नहीं चूकते। जहाँ कही भी सार्वजनिक जगह पर तथाकथित इज़्ज़तदार लोग बैठकर चाय पीते या अखबार पढ़ते या गुफ़्तुगू करते थे उसे वहाँ से भगा दिया जाता था।  वो किसी के घर क...

कहीं कोई गलतफहमी में ना रह जाये

 धर्म का प्रयोग देह की तृप्ति के लिये होना कोई नई बात नहीं। कोई ना कोई या तो इस पागल पन में सम्मिलित है या इससे प्रताड़ित है। लगभग सभी सम्प्रदाय इस प्रयोग में सफल हो चुके हैं। ईसाइयो ने बाईबल को पूर्णतः त्यागकर प्रोटस्टेंट की आड़ में ईसाइयत से पूरी तरह निकलकर भौतिकवादी सामाजिक संरचना का अविष्कार कर उसको जीवन प्रणाली बना ही लिया। अब एक ठोस प्रेरणा स्त्रोत के के रूप में डॉलर आधारित व्यवस्था है। गगनचुंबी इमारतों से भरे महानगर। वो बेंचने के लिए आतुर एक ऐसी चमक धमक भारी व्यवस्था का निर्माण कर चुके जिसमें शिक्षा, स्वास्थ, सैन्य उपकरण, सेनाएं, तकनीकी, संचार, पानी, खाना यहां तक कि जीवन और मृत्यु सब कुछ व्यवसाय के रूप में बिक रहा है। धर्म को पूर्णतः त्यागकर जिस पथ पर पूरी ईसाई दुनिया चल रही है उसमें फिर भी दबी कुचली मानवता के लिये कहीं कोई रास्ता निकल जाता है भले ही उसके बदले दुनिया के किसी एक या एक से अधिक हिस्सों को युद्ध क्षेत्र बनकर इस चमक धमक चुकानी पडती हो। अगर गैर ईसाई इलाक़ों में ना सही तो वो अपबे ही किसी ईसाई टुकड़े पर (जैसे यूक्रेन) बम बरसाकर ही अपनी गगनचुंबी इमारतों की भव्यता को यथाव...

पहला मोबाईल फ़ोन

3 अप्रैल 1973 को अमेरिकी इंजीनियर मार्टिन कूपर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहला मोबाइल फोन सबके सामने पेश किया। इसका वज़न एक किलो से ज़्यादा था। फोन की लम्बकी 10 इंच  चौड़ाई डेढ़ इंच और मोटे तीन इंच थी। एक बार चार्ज होने पर आधे घंटे बात होती थी।

डिप्रेशन, एंग्जायटी बीमारी हैं इसे नज़रअंदाज ना करें

डिप्रेशन इंसान ज़िन्दगी को ऐसी जगह ले जाकर छोड़ देता है जहाँ ना इंसान जी पाता है, बनावटी हँसी और खुशी के साथ एक घाव लगे दिल के साथ उम्र गुज़ारने को मजबूर होता है। कोई उत्साह उमंग या तो होती ही नहीं या फिर बस पास से होकर गुज़र जाती है। डिप्रेशन या एंग्जायटी का बीमार दुनियां में सिर्फ बुरा वक्त गुज़रता है। जी नहीं पाता। डिप्रेशन, एंजाइटी, हाइपरटेंशन, अवसाद यें सब वो बीमारियां हैं जो आदमी को कहीं का नहीं छोड़ती।  आदमी स्वस्थ दिखाई देता है मगर कोई नही जान सकता कि अवसाद का मरीज़ किन हालात से गुज़रता है। रात रात भर फ़ोन के बहाने जागना। बिना वजह बेकार की वीडियो देख कर वक़्त गुज़रते रहना। जब तक दिमाग़ और आँखें जवाब ना दे जाएं तब तक फ़ोन चलाना। फिर बहुत देर से सोना। सुबह बगैर किसी ऊर्जा के उठना। दिल पर काले साये के साथ उठना। कोई उमंग कोई उत्साह का ना होना। घर या काम की जगह बहुत ज़्यादा गुस्सा आना फिर घर या काम वालों को बहुत कुछ कह सुन देना। फिर पछताना। ज़िन्दगी के किसी नए काम को करने से पहले उत्साह के बजाए मायूसी और नकारात्मकता होना। बैठे बैठे सोचने की बीमारी का होना। महफ़िल में बैठे हों तो ज़हन...

बर्रे सग़ीर जैसा कोई नहीं

काश कि इनको मौत आती! कितने बेबस है ये लोग जो मर नहीं सकते! इन्हें लोगों से ईर्ष्या होती है! लोग पैदा होते जीते है मरते है! ये लोग ना कभी पैदा होते है ना जीते हैं ना मरते है! इनके मारने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता! ये मरे हुए ही इस दुनियां में आये थे मैरे हुए ही जल जाते है दफ़न हो जाते है! यें रोटी टुकड़े को तरसते लोग, टुकड़ा मिल जाये तो छत को तरसते लोग! छत मिल जाये तो बर्तनों को तरसते लोग! बर्तन मिल जाएं तो गहनों को तरसते लोग! गहनें मिल जाएं तो रुपयों को तरसते लोग! रुपये मिल जाएं तो अरमान को तरसते लोग! अरमान मिल जाएं तो ख्वाबों को तरसते लोग! ख़्वाब मिल जाएं तो आंखों को तरसते लोग! आँखें होती नहीं मुर्दों की! मुर्दे जी नहीं सकते, कुछ कह नहीं सकते, कुछ सुन नहीं सकते! मुर्दों के दिल नही होता धड़कन नहीं होती! मुर्दों में हिर्स होती है तकब्बुर होता है! मुर्दे सड़ते हैं, झगड़ते है ! मुर्दों के दिल नहीं तो ख़ुदा कहां से आएगा? मुर्दे ख़ुदा के नाम पे झगड़ें तो झगड़ा कहां कहलायेगा? लोग दुनियां में आते है दुनियां से चले जाते है! अंधेरा देखते हैं उजालों से खिल जाते हैं! मुर्दे हज़ारों सालों से मौ...

Abid Saifi Hindustani : Shining Rising

In today's sociopolitical system where everything getting it's space by step downing other, some people still living a life for awakening the society. From an ordinary family of shamli, he has been tweeted by Rahul Gandhi, the cheif of India's oldest and longest ruled political party.  He serves the pilgrim of Kannwad Yatra. The people of Hindu religion going for Pilgrimage. This act of serving has become national unity symbol of India. The image has been shared billion on time not in India but internationally.  Cabinate Ministers of ruling state government choose him to be eligible to represent the zone. And visit his home.  Despite criticism which is a common phenomenon of society for everyone who rises, he is inspiration for many who has no back support, can rise and shine.  Today is his birthday.  Not he only but thausands are celebrating him.

Counseling Program for higher education by Nadeem Sir

एडुकेशन के ज़रिए इंसानों के लिए बेहतर ज़िन्दगी की उम्मीद को अपना मिशन बनाकर मैने जो काम शुरू किया था वो अब फैलने की तरफ है। अब लोग सुनने भी लगे हैं और समझने भी लगे हैं। हालांकि शिक्षा पर काम बहुत ज़्यादा हो रहा है। पहले के मुकाबले अब बहुत ज़्यादा लोग पढ़ लिख रहे हैं। मगर जब आप देहात के इलाक़ो में जाएंगे तो आप देखेंगे कि अभी भी बहुत सारे बच्चे या तो स्कूल नहीं जाते या थोडा बहुत पढ़कर छोड़ देते है। शिक्षा का जो मक़सद है कि इंसान को ज़्यादा समझदार, ज़्यादा सभ्य और ज़्यादा अनुशाषित बनाना वो काम तो हो ही नही पा रहा साथ साथ एजुकेशन की हासिल की जा रही है तो संस्कारों की तिलांजलि देकर। देखा जाए तो रुपये कमाने और अपनों से बदबू आने से ज़्यादा कोई और परिणाम शिक्षा का नही निकल पा रहा है। सरकारी नॉकरी हो या प्राइवेट बस शक्षित व्यक्ति ज़्यादा चालाकी से रुपये कमा पॉय रहा है और कुछ नहीं। इसी बात को ध्यान में रखकर मैने जो मिशन अपने हाथों में उठाया है वो यही है कि शिक्षा हो और वो भी असल मगर संस्कार पहले। मेरी निगाहों में जो शिक्षित व्यक्ति की कल्पना है वो वही है जो समाज के उत्थान के लिए जान लड़ा देने वाला बने। उसके लि...

Brilliant Classes Muzaffarnagar for NEET IIT

दिनाँक 13 फरवरी 2022 को इंजिनीरिंग और नीट के लिए मुज़फ्फरनगर की सबसे प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान ब्रिलिएंट क्लासेज में अवार्ड समारोह सम्पन्न हुआ। इसमे इंजीनियर नदीम सैफ़ी सर् द्वारा संचालित ब्रिलिएंट क्लासेज के दो विद्यार्थियों को जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में चयनित होने पर मैडल तथा अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। साथ ही शहर के प्रततिष्ठित समाजसेवी, एकेडेमिक एडवोकेट गुफरान आज़ाद साहब को उनकी सेवाओं के लिए अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। मोहम्मद साद s/o मोहम्मद राशिद साहब (ग्राम दधेडू) को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं हाफ़िज़ मोहम्मद आतिफ़ s/o मास्टर तालिब (ग्राम दधेडू) को मेकैनिकल इंजीनियरिंग में ब्रिलिएंट क्लासेज में पढ़कर जामिया मिल्लिया में प्रवेश मिला है। समारोह में इकोनॉमिक्स के प्रोफ़ेसर तथा मरियम फाउंडेशन के फाउंडर प्रोफेसर मोहम्मद आरिफ़ द्वारा उच्च शिक्षा, आईआईटी जेईई, नीट आदि और कैरियर के बारे में विस्तार से समझाया गया। उसके बाद आइलेट्स और जीआरई जैसे अंतरराष्ट्रीय कॉम्पिटिशन के जाने माने कोच गिरीश भारद्वाज ने ब्रिलिएंट क्लासेस...

पहला इम्तिहान

1. वो शख्श दुनिया की तमाम उन किताबों को पढ़ता नहीं पढ़ाता है जिन में ज़िन्दगी के कामयाब होने के रास्ते लिखे हैं मगर अंदर से उसका दिल जानता है कि दुनिया का नाकामयाब तरीन शख्श है। 2. ज़िन्दगी का पहला इम्तिहान हारे हुए लोग जिनके दिलों के बीचों बीच एक स्याह नुक्ता है जिसके रिसने वाला ज़हर उनकी पूरी हस्ती को मुसलसल मायूसी और अंधेरो में झोंकता रहता है। पहला इम्तिहान माँ बाप थे जिनकी नाफ़मानी आज एक अजदाह बनकर दिल को लपेटे बैठी है और एक लम्हा ऐसा नही जो ये अजदाह डंक ना मारती हो। 3. दुनियां में जिस हस्ती को ज़बान के सबसे ज़्यादा मिठास की ज़रूरत थी उसी को धमकाया गया, ककड़ कर बोला गया, उसकी तीर की तरह चुभने वाली बाते कही गयी। हर वो काम किया गया जिससे उसके लिए को ठेस पंहुचे। माँ को सबसे ज़्यादा नरमी की ज़रूरत थी और उसके दिल को अपनी नाकामियों की झलें उतारने का मक़ाम बना कर रख दिया गया। 4. बाप की ख्वाहिश थी कि फरमाबरदार बेटा होता तो पचपन से जैसे नशा हो हर उस काम कल करने का जिसको ना करने का बाप ने हुक्म दिया हो और हर वो काम को ना करना जिसको बाप ने करने के लिए कहा हो। ऐसा लगता है कि ज़िंदगी का पहला हिस्सा बाप को मा...

मेहनत कश तबके की ज़िंदगी

यूं तो दुनियां अलग अलग किस्मों केआदमियों से भरी हुई है। इसलिए यहाँ तबके पाये जाते है। इस तबके के कुछ रोचक और वास्तविक पहलू इस तरह हैं। 1. इनकी ज़िंदगी मे सबसे बड़ा धर्म काम करना है और सबसे बड़ा गुनाह काम ना करना। 2. इनको काम करने के बाद अपने काम के बदले मिलने वाले रुपयों का इंतजार करना। रुपये मिलने पर खुशी की लहर दौड़ जाना और ना मिलने पर मायूसी और ज़्यादा शिद्दत से रुपयों का इंतजार करना । 3.इनको फ़लसफ़े ज़्यादा छू नही पाते और ना ये लोग बहुत ज़्यादा गहराई से सोच सकते है क्योंकि इनको अपना काम पूरे ध्यान से करना होता है। 4. इनको विरासत में सिर्फ सर ढकने को छत और मामूली रुपये मिल जाते है या कभी कभी वो भी नहीं। 5. इनको जल्दी से रुपये और इज़्ज़त कमाने की लालसा तो होती है मगर मेहनत करके कमाने की इतनी ज़्यादा आदत पड़ चुकी होती है कि अगर कही कोई शार्ट कट मिल भी जाये तो शक की निगाह से देखते हैं। अगर कहीं लालच में आकर कुछ रुपया कही इन्वेस्ट भी कर देते हैं तो वो अक्सर डूब ही जाता है। 6. पूरी ज़िंदगी इस आस में गुज़ार देते हैं कि हमारी औलाद को हमारी तरह मेहनत ना करनी पड़ जाए मगर साथ साथ बचपन से अपने बच्...