काश कि इनको मौत आती!
कितने बेबस है ये लोग जो मर नहीं सकते!
इन्हें लोगों से ईर्ष्या होती है!
लोग पैदा होते जीते है मरते है!
ये लोग ना कभी पैदा होते है ना जीते हैं ना मरते है!
इनके मारने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता!
ये मरे हुए ही इस दुनियां में आये थे मैरे हुए ही जल जाते है दफ़न हो जाते है!
यें रोटी टुकड़े को तरसते लोग, टुकड़ा मिल जाये तो छत को तरसते लोग!
छत मिल जाये तो बर्तनों को तरसते लोग!
बर्तन मिल जाएं तो गहनों को तरसते लोग!
गहनें मिल जाएं तो रुपयों को तरसते लोग!
रुपये मिल जाएं तो अरमान को तरसते लोग!
अरमान मिल जाएं तो ख्वाबों को तरसते लोग!
ख़्वाब मिल जाएं तो आंखों को तरसते लोग!
आँखें होती नहीं मुर्दों की!
मुर्दे जी नहीं सकते, कुछ कह नहीं सकते, कुछ सुन नहीं सकते!
मुर्दों के दिल नही होता धड़कन नहीं होती!
मुर्दों में हिर्स होती है तकब्बुर होता है!
मुर्दे सड़ते हैं, झगड़ते है !
मुर्दों के दिल नहीं तो ख़ुदा कहां से आएगा?
मुर्दे ख़ुदा के नाम पे झगड़ें तो झगड़ा कहां कहलायेगा?
लोग दुनियां में आते है दुनियां से चले जाते है!
अंधेरा देखते हैं उजालों से खिल जाते हैं!
मुर्दे हज़ारों सालों से मौजूद है!
ना कहीं से आते हैं ना कहीं जाते है!
मुर्दों को नाम चाहिए ख़ुदा नहीं!
मुर्दों की ख़ुदा से कोई इल तजा नहीं।
मुर्दों को बस खाना है पीना है सोना है!
मुर्दो का रोशनी से बदलाव से कोई ताल्लुक़ नहीं होता!!!
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