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Khurshid Alam

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Nawab Alam "a name in NEET"

"Some people become inspiration to others, their costant struggle, their target achieving hard work makes them symbol of success" Born in Kairana in an ordinary family. Qualified entrance test for admission in AMU. He passea 12th class from school of Aligarh Muslim University. then Qualified One of most toughest exam in India the "AMUEEE" and finally pursued B.Tech degree from prestigious Zakir Hussain College, AMU Aligarh. His passion for education not break here. but he appaers in one of the moat toughest exam in world "GATE" and get admission in M.Tech in world famous intitute for technical education, the IIT (Indian Institute of Technology, Guwahati) and finally got degree of M.Tech from same institution. everyone knows that after getting suchbhigh degree from IIT, one has chance to go to MNCs with high package or high salary jobs in teaching engineering in central universities. But denstiny was different. He choose yto serve public and returned t...

कृष्ण की बात कब समझ आती है

एक दिन में गीता अध्ययन कर रहा था। मेरे मन में पूछा,"क्या कृष्ण को जाना जा सकता है ? कोई माध्यम कोई अनुसन्धान क्या मुझे कृष्ण तक ले जा सकता है?" कृष्ण को जानने के सारे प्रयत्न विफल प्रतीत हुए तो मैने इस बात को समझ लिया कि कृषणजाने नहीं जा सकते। कृष्ण जानने का विषय नहीं हो सकते। अंतरात्मा से नई सोच का उदगम हुआ। मन ने कहा "कृष्ण को पाया जा सकता है जाना नही जा सकता " क्या कृष्ण राधा के कृष्ण है जो प्रेम की उत्कृष्ट गाथा को बुनते दिखाई पड़ते हैं या चमत्कारी कृष्ण जो राक्षसों का नाश कर देते है या वो कृष्ण जो अर्जुन के माध्यम से पूरे संसार को गीता जैसा अद्भुत ज्ञान देते है।  अक्सर पढ़ने वाले समझ बैठते हैं कि गीता को पढ़ लेने से उन्हें कृष्ण की अनुभूति हो जाती है।  जिस ने गीता पढ़ी है वो कुछ बिंदुओं पर ध्यान दें 1. गीता मनुष्य को अपने, अपने जीवन,अपनी आत्मा, सम्बंध, पूरे जीवन चक्र के हर बिन्दु के अनसुलझे प्रश्नों का पूर्ण हल देती है। 2. मनुष्य के सामने जीवन का सबसे बड़ा प्रश्नः परमात्मा से उसके सम्बन्ध का है जिसे गीता में कृष्ण बहुत ही आसानी से हल करते हैं। जब अर्जुन ...

NEET की तैयारी करना हुआ आसान: Pulse Academy

Nadeem Sir Ex Faculty, Bansal Tutorial NEET IIT Expert Pulse Neet Academy Yogendra Puri Muzaffarnagar Contact 6395227834 हिंदी मीडियम के स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी।। हिंदी मीडियम के वो स्टूडेंट्स जो भविष्य में एमबीबीएस करना चाहते हैं उनकी होनहार सक्षम होने के बावजूद उनका हिंदी मीडियम से होना नीट परीक्षा की तैयारी करने में बड़ी मुश्किलें पैदा करता है। मगर अब हिन्दी मीडियम से 12वीं पास करने वाले स्टूडेंट्स की ये दुविधा पल्स एकेडमी में आकर खत्म हो रही है। पल्स एकेडमी में हिंदी और इंग्लिश दोनो मीडियम के स्टूडेंट्स के लिए अलग अलग बैच की सुविधा कर दी गयी है।  एक मिथक (गलतफहमी) हिंदी मीडियम के स्टूडेंट्स से कही जाती है वो ये की अगर आप हिंदी मीडियम में तैयारी कर नीट की परीक्षा पास कर भी लेते हैं तो एमबीबीएस तो आपको इंग्लिश मीडियम में रहकर ही पढ़ना होगा ? इस दुविधा का हल ये है कि एक स्टूडेंट्स के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य नीट परीक्षा पास कर सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेना होता है। चूंकि नीट की परीक्षा हिंदी मीडियम में भी होती है इसलिए आप अगर हिंदी मीडियम से आते हैं...

कोई टाइटल नहीं बस हिम्मत चाहिए पढ़ने को

उस बस्ती में एक पागल था या सारा गाँव का गाँव पागल था  ? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए मैन कुछ दिन तक गाँव के चक्कर लगाए। उस गाँव मे मेरे कुछ परिचित भी थे जिनसे बहुत अच्छे संबंध होने की वजह से मेरे रोज़ाना आने जाने का संकोच भी आड़े नहीं आ पाया।  गाँव के अंदर मेरा आकर्षण मात्र एक ही व्यक्ति था। वो जिसे राजू कहकर पुकारा या चिढ़ाया जाता था। में उसको गांव के अलग अलग तिरस्कृत जगहों पर बैठा देखता था या फिर हाथ में पत्थर लिए लड़कों को मारते। एक तरफ लड़कों का झुंड, वो उसे कुछ अपशब्द कहते, ठहाके लगाते, फिर वो उनके पीछे पत्थर लेकर भागता, वो तितर बितर हो जाते फिर। फिर वो पत्थर फेंक कर अपना सिर खुजाता अपने जिस्म के किसी भाग को खुरचता और चला जाता। लोगों ने बताया कि छेड़ने का ये द्रश्य दिन में चार पाँच बार नित प्रतिदिन होता रहता है।  गाव के हर वर्ग के जवान हो या बच्चे पत्थर लगने के संकट के बावजूद उसको छेड़ने का रस लेने से नहीं चूकते। जहाँ कही भी सार्वजनिक जगह पर तथाकथित इज़्ज़तदार लोग बैठकर चाय पीते या अखबार पढ़ते या गुफ़्तुगू करते थे उसे वहाँ से भगा दिया जाता था।  वो किसी के घर क...

कहीं कोई गलतफहमी में ना रह जाये

 धर्म का प्रयोग देह की तृप्ति के लिये होना कोई नई बात नहीं। कोई ना कोई या तो इस पागल पन में सम्मिलित है या इससे प्रताड़ित है। लगभग सभी सम्प्रदाय इस प्रयोग में सफल हो चुके हैं। ईसाइयो ने बाईबल को पूर्णतः त्यागकर प्रोटस्टेंट की आड़ में ईसाइयत से पूरी तरह निकलकर भौतिकवादी सामाजिक संरचना का अविष्कार कर उसको जीवन प्रणाली बना ही लिया। अब एक ठोस प्रेरणा स्त्रोत के के रूप में डॉलर आधारित व्यवस्था है। गगनचुंबी इमारतों से भरे महानगर। वो बेंचने के लिए आतुर एक ऐसी चमक धमक भारी व्यवस्था का निर्माण कर चुके जिसमें शिक्षा, स्वास्थ, सैन्य उपकरण, सेनाएं, तकनीकी, संचार, पानी, खाना यहां तक कि जीवन और मृत्यु सब कुछ व्यवसाय के रूप में बिक रहा है। धर्म को पूर्णतः त्यागकर जिस पथ पर पूरी ईसाई दुनिया चल रही है उसमें फिर भी दबी कुचली मानवता के लिये कहीं कोई रास्ता निकल जाता है भले ही उसके बदले दुनिया के किसी एक या एक से अधिक हिस्सों को युद्ध क्षेत्र बनकर इस चमक धमक चुकानी पडती हो। अगर गैर ईसाई इलाक़ों में ना सही तो वो अपबे ही किसी ईसाई टुकड़े पर (जैसे यूक्रेन) बम बरसाकर ही अपनी गगनचुंबी इमारतों की भव्यता को यथाव...

पहला मोबाईल फ़ोन

3 अप्रैल 1973 को अमेरिकी इंजीनियर मार्टिन कूपर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहला मोबाइल फोन सबके सामने पेश किया। इसका वज़न एक किलो से ज़्यादा था। फोन की लम्बकी 10 इंच  चौड़ाई डेढ़ इंच और मोटे तीन इंच थी। एक बार चार्ज होने पर आधे घंटे बात होती थी।