दुखीराम!
परपीड़क कौन होते है ? तुम्हारा प्रश्न बिल्कुल सही है। क्योंकि तुम्हारी हिंदी में तो तुम्हारे मोडल पेपर से की गई पढ़ाई सालों पहले आग लगा ही चुकी है। तो फिर तुम्हे कैसे समझ आये परपीडक। चलो पढ़ते जाओ। अंत तक समझ आ ही जायेगा।
वो तुम्हारे पास बड़े प्रेम और सम्मान के साथ आता है। थोड़ा हाल चाल पूछता है। फिर कहता है, " और क्या चल रहा है आजकल ?" फिर तुम उसे सारी रामलीला सुनाते हो। वो बडे ध्यान से सुनता भी है। फिर वो तुम्हे कुछ टिप्स देता है। फिर किसी काल्पनिक आदमी की सफलता का गुणगान करता है। उसकी बातों में धीरे धीरे तुम और उस काल्पनिक व्यक्ति के बीच तुलना शुरू हो जाती है। वो तुम्हे सीधे कुछ कहे तुम्हे उस काल्पनिक आदमी के सामने छोटा करता जाता है। तुम मन ही मन अपने आप को गिरा हुआ या असफल समझने लगते हो। बीच बीच मे तुम उसे टोकना भी चाहते हो मगर क्योंकि वो सीधा तुम्हे कुछ नही कहता इसलिए तुम कहते कहते रुक जाते हो। इस तरह उसकी बातों के अंत तक तुम अपनी निगाह में पूरी तरह गिर चुके होते हो। वो तुम्हे मानसिक चोट दे चुका होता है। वो अपना काम पूरा कर चुका होता है। और दूसरी जगह नए आदमी का बेड़ा ग़र्क़ करने की योजना बनाते हुए तुम्हे अलविदा कह कर उठ जाता है। छोड़ जाता है अपने पीछे तुम्हारा टूटा हुआ दिल।
बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम खेत खलियान या शाम को छत पर ठंडी हवा का मज़ा ले रहे होते हो। वो बड़े प्यार से तुम्हारे सबसे नाज़ुक हिस्से पर आकर बैठ जाता है। फिर धीरे धीरे अपना विष अपने डंक के माध्यम से तुम्हारे शरीर मे उतार कर दफा हो जाता है नये शिकार की तलाश में। यूँ तुम्हे घोर दुख में डाल जाता है।
मेरा मानना है कि तुम्हे शब्द परपीडक समझ आ गया होगा। और ये भी के जानवर के भेष में कम इंसानो के भेष में ये ज़्यादा आता है। परपीड़क एक संज्ञा है। किसी विशेष कीड़े का नाम नहीं।
परपीडको से बचने का एकमात्र तरीक़ा है चौकन्ना रहना। किसी से भी मिलने से पहले इस संभावना पर थोड़ा गौर कर लें कि ये एक परपीड़क हो सकता है। कई बार हमारे मन मे हम खुद नेगेटिव विचार ले आते है। ये हमारा पैदा किया हुआ परपीपडक होता है। इसे अपने पास आने ही मत दें। परपीड़क बहुत दुख देता है। अपनी ज़िंदगी को खुशहाल बनाए रखें।
ये तो जीवन की सच्चाई है मगर परपीडकों का शिकार प्रत्येक बार हम ही नहीं होते हैं अक्सर हम करते भी हैं।
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