उस शहर में हर आदमी के मुँह में लकड़ी की चम्मच लगी थी। बंद मुँह के खुलने का इलाज चम्मच द्वारा ही होता था। जो मरने से बच जाते थे उनका का इलाज चम्मच से मुमकिन था क्योंकि मेरे हुए को बोलने या खाने के लिए मुँह को खोलने की आवश्यकता होती ही नही है। मरे हुओं को दफनाते हुए उनके मुंह मे चम्मच लगा दी जाती थी। उस शहर में आबादी ठीक थी मगर सन्नाटा सा रहता था। घर घर लघु उद्योग की तर्ज पर छोटी छोटी चम्मच बनाने की मशीनें लगी थी जिन पर चम्मच बना बना कर गरीब घरेलू स्त्रियां पेट भरने योग्य पैसा कमा लेती थी। स्त्रियों का काम करना ज़रूरी था क्योंकि सारे मर्द मुह में चम्मच लगाए बुतों की तरह झुंड बनाकर सिर्फ बैठने के काम करते थे हालांकि मुँह से कुछ नही बोलते थे क्योंकि सभी के मुंह मे चम्मच लगी थी।
मुँह का बंद होते जाना एक बीमारी है जिसमे धीरे धीरे मुह का आकार काम होने लगता है और एक दिन मुँह बंद हो जाता है। उससे रोकने के लिए डॉक्टर मुह में चम्मच लगाते है । एक फिर दो फिर तीन ताकि धीरे धीरे बैंड हुआ मुँह खोला जा सके।
उस शहर के सभी मर्दो ने एक समय मे बहुत गुटखा और पान खाया था।
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