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Nawab Alam "a name in NEET"

"Some people become inspiration to others, their costant struggle, their target achieving hard work makes them symbol of success" Born in Kairana in an ordinary family. Qualified entrance test for admission in AMU. He passea 12th class from school of Aligarh Muslim University. then Qualified One of most toughest exam in India the "AMUEEE" and finally pursued B.Tech degree from prestigious Zakir Hussain College, AMU Aligarh. His passion for education not break here. but he appaers in one of the moat toughest exam in world "GATE" and get admission in M.Tech in world famous intitute for technical education, the IIT (Indian Institute of Technology, Guwahati) and finally got degree of M.Tech from same institution. everyone knows that after getting suchbhigh degree from IIT, one has chance to go to MNCs with high package or high salary jobs in teaching engineering in central universities. But denstiny was different. He choose yto serve public and returned to his home town Karana and inspired and tought students of very low academic background. He not only tought their but ignit a wave for higher education like IITJEE NEET. Now, thousands of students in region of Kairana and surrounding has settled in IITs and Top medical college in India. after serving his hometown for three years, Nawab Alam started national level project for NEET and IIT JEE education. He started CCE PMT in Delhi. In his fiest year of acedemic teaching excellence, the result was amazing. A record number of students selected from CCE

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 धर्म का प्रयोग देह की तृप्ति के लिये होना कोई नई बात नहीं। कोई ना कोई या तो इस पागल पन में सम्मिलित है या इससे प्रताड़ित है। लगभग सभी सम्प्रदाय इस प्रयोग में सफल हो चुके हैं। ईसाइयो ने बाईबल को पूर्णतः त्यागकर प्रोटस्टेंट की आड़ में ईसाइयत से पूरी तरह निकलकर भौतिकवादी सामाजिक संरचना का अविष्कार कर उसको जीवन प्रणाली बना ही लिया। अब एक ठोस प्रेरणा स्त्रोत के के रूप में डॉलर आधारित व्यवस्था है। गगनचुंबी इमारतों से भरे महानगर। वो बेंचने के लिए आतुर एक ऐसी चमक धमक भारी व्यवस्था का निर्माण कर चुके जिसमें शिक्षा, स्वास्थ, सैन्य उपकरण, सेनाएं, तकनीकी, संचार, पानी, खाना यहां तक कि जीवन और मृत्यु सब कुछ व्यवसाय के रूप में बिक रहा है। धर्म को पूर्णतः त्यागकर जिस पथ पर पूरी ईसाई दुनिया चल रही है उसमें फिर भी दबी कुचली मानवता के लिये कहीं कोई रास्ता निकल जाता है भले ही उसके बदले दुनिया के किसी एक या एक से अधिक हिस्सों को युद्ध क्षेत्र बनकर इस चमक धमक चुकानी पडती हो। अगर गैर ईसाई इलाक़ों में ना सही तो वो अपबे ही किसी ईसाई टुकड़े पर (जैसे यूक्रेन) बम बरसाकर ही अपनी गगनचुंबी इमारतों की भव्यता को यथाव...

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