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पहला मोबाईल फ़ोन

3 अप्रैल 1973 को अमेरिकी इंजीनियर मार्टिन कूपर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहला मोबाइल फोन सबके सामने पेश किया। इसका वज़न एक किलो से ज़्यादा था। फोन की लम्बकी 10 इंच  चौड़ाई डेढ़ इंच और मोटे तीन इंच थी। एक बार चार्ज होने पर आधे घंटे बात होती थी।

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ज़िन्दगी का गणित (Anti Depression Post)

तुम खुद को समझते क्या हो ? क्या तुम्हें हिसाब किताब के लिए बनाया गया है या हिसाब किताब को तुम्हारे लिए। तुम कोई भी घटना घटित ही नहीं होने दे रहे। तुम्हारा दिमाग में कुछ भी होन...

कृष्ण की बात कब समझ आती है

एक दिन में गीता अध्ययन कर रहा था। मेरे मन में पूछा,"क्या कृष्ण को जाना जा सकता है ? कोई माध्यम कोई अनुसन्धान क्या मुझे कृष्ण तक ले जा सकता है?" कृष्ण को जानने के सारे प्रयत्न विफल प्रतीत हुए तो मैने इस बात को समझ लिया कि कृषणजाने नहीं जा सकते। कृष्ण जानने का विषय नहीं हो सकते। अंतरात्मा से नई सोच का उदगम हुआ। मन ने कहा "कृष्ण को पाया जा सकता है जाना नही जा सकता " क्या कृष्ण राधा के कृष्ण है जो प्रेम की उत्कृष्ट गाथा को बुनते दिखाई पड़ते हैं या चमत्कारी कृष्ण जो राक्षसों का नाश कर देते है या वो कृष्ण जो अर्जुन के माध्यम से पूरे संसार को गीता जैसा अद्भुत ज्ञान देते है।  अक्सर पढ़ने वाले समझ बैठते हैं कि गीता को पढ़ लेने से उन्हें कृष्ण की अनुभूति हो जाती है।  जिस ने गीता पढ़ी है वो कुछ बिंदुओं पर ध्यान दें 1. गीता मनुष्य को अपने, अपने जीवन,अपनी आत्मा, सम्बंध, पूरे जीवन चक्र के हर बिन्दु के अनसुलझे प्रश्नों का पूर्ण हल देती है। 2. मनुष्य के सामने जीवन का सबसे बड़ा प्रश्नः परमात्मा से उसके सम्बन्ध का है जिसे गीता में कृष्ण बहुत ही आसानी से हल करते हैं। जब अर्जुन ...

कुत्ता

बचपन मे सुनी हुई एक रिवायत ज़हन से गुजरी जिसमे एक सहाबी (ग़ालिबन हज़रत अब्दुर्रहमान बिन ऑफ रज़ियल्लाहु अन्हु) का ज़िक्र था। रावी लिखता है कि उसने अब्दुर्रहमान को सफर के दौरान खाना खाते हुए देखा। पास में उनका कुत्ता बैठा हुआ था। खाने का अच्छा और ज़्यादातर हिस्सा आपन कुत्ते को खिला रहे थे। रावी ने इस अमल का सबब पूछा तो आपने रज़ियल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया कि अल्लाह की मख़लूक़ मुझे उम्मीदों से देख रही हो और में बेहतरीन हिस्सा खुद कहा जाऊ। ऐसा कैसे हो सकता है? सिलसिलेवार मुझे उम्र का दजला नहर के पास खड़े कुत्ते से मिसाल देकर समझाना याद आता है। फिर असहाब ए कहफ़ का कुत्ता, याहया अलैस्सलाम का कुत्ता। पता नही कौन सी दुनिया मे खो गया में। घर से निकला तो फिर सड़क से सफेद रंग का कुत्ता आकर पास खड़े हो गया और छूने की कोशिश करने लगा। में उस मासूम के बदन पर अपने आस पड़ोस के लोगों के मारे हुए ज़ख्म देख रहा था और मजबूर था कि उसको एक टुकड़ा खिला सकूं। मुझे उसे कुछ भी खिलाने के लिए अपने घर से दूर ले जाना पड़ता है ताकि कोई देख ना ले। क्योंकि कुत्तों को खाना खिलाना भी उन मेरे आस पास के लोगो के लिए मुझसे लड़ने का एक बहाना बन...