/*कहानी है कहानी की तरह पढ़िए। इससे मेसेज लेने की कोशिश करना।*/
1947
पार्टीशन का वक़्त है। एक मुल्क के दो हिस्से हो रहे है। लोग एक हिस्से से दूसरे में अपनी जानें बचा बचा कर भाग रहे हैं। दंगाइयों की लापरवाहियों से एक ट्रेन ज़िन्दा बच कर आ गयी। वर्ना लौटकर सिर्फ ड्राइवर ही आता है और लाशों से भरी ट्रैन।
जो ट्रैन बच गयी। उसमे लोग खचाखच भरे है। ट्रैन चलने ही वाली थी कि एक प्रग्नेंट औरत बोझभरी चाल से ट्रैन की तरफ चली आ रही थी। लोगों ने बड़ी मुशक़्क़तों से उसे ट्रैन के डिब्बे की छत पर चढ़ा दिया। ट्रैन चली, चिनाब दरिया आने से एक घंटे पहले ही उसने ट्रैन के डब्बे की छत पर ही दो बच्चों को जन्म दिया। एक ज़िन्दा दूसरा मरा हुआ। वो दोनों को अपने सीने से चिमटाए बैठी रही। आस पास की भीड़ उसे कहने लगी कि मरे हुए बच्चे को चिनाब दरिया में फेंक दो। इसका सबसे अच्छा अंतिम संस्कार होगा। उसने रोते हुए कहा कि इसे नौ महीने पेट मे रखा, कुछ देर तो सीने से लगाने दो। लोग नहीं माने और एक बच्चा चिनाब आते ही छीन लिया। जैसे ही ट्रेन चिनाब के ऊपर से गुजरी, उस औरत के लाख चिल्लाने चीखने पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। और बच्चे को चिनाब में फेंक दिया।
बच्चा लगभग बीस फ़ीट हवा में गिरा होगा। उस बच्चे की चींख निकली और उसने हाथ भी हिलाया। लोगों ने देखा तो वो ज़िन्दा बच्चे को फेंक चुके थे और मरा हुआ बच्चा माँ की गोद मे था।
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यही आपके आस पास के लोग आपकी साथ करते है। ज़्यादातर लोगों की कहानी उतनी ही दुखदायी है जितनी ये कहानी। लोग आपको आपका जीवन, अनमोल जीवन। सुनहरे पल आपसे बहुत कम क़ीमत में छीन छीन कर इसी तरह दारिया में फेंक रहे है। और आपकी झोली में आता है वही जिसमें कोई जीवन नही है। जहाँ आप अपना जीवन लगाते है या कहिये जिस समय को आपसे छीन लिया जाता है। उसके बदले में आपको कुछ नही मिलता। जीवन आपका है और आपको इसे वहीं लगाना है जहाँ ये ऊंचाइयां हासिल करे। जहां इसका मकसद पूरा हो। जहाँ हर पल नए जीवन की बुनियाद रखता हो। सुनहरे आनंदमयी जीवन की आधारशिला। किसी भी हालत में अपने जीवन यानी समय को आपके चारों तरफ बसे बकवास लोगों को ना दे। सही जगह लगने वाला जीवन आपके अगले अनंत जीवन को जूं का त्युं मिल जाएगा। लोग आपकी झोली में सिर्फ मरा हुआ कुछ छोड़ सकते है। वो जो कुछ भी है आप ही उसे पैदा करते है। उस पर सिर्फ आपका अधिकार है।
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