Skip to main content

इंग्लिश के इन वर्ड्स का प्रयोग आपको बेवकूफ बनाने के लिए किया जाता है

इंग्लिश हो या कोई और भाषा आदमी सीखता है अपने रोज़गार, कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए। क़ाबिल आदमी ज़रूरत पड़ने पर अगर इंग्लिश बोलेगा तो उसका स्त्रोत क्या होगा ? सीधी सी बात है वो किताबें जो उसने अपने अकादमिक करियर में पढ़ी होंगी। अगर इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ , आर्ट्स आदि के भारी भरकम कोर्स करने के बाद भी आपको इंग्लिश बोलने के लिए ट्रेनिंग की ज़रूरत पैड रही है तो वजह हैं वो नाक़ाबिल और बकवास लोग जो नाक़ाबिल होते हुए भी थोड़े से छिछोरेपन और इंग्लिश से कुछ शब्दों को निकालकर उनका गलत प्रसंग में इस्तेमाल करते हैं। अब ये बीमारी अपनी जगह बना चुकी है। इसलिए आप घबराइए और डरिये नही। यक़ीन मानिए कॉर्पोरेट की पैदा करदा इस इंग्लिश से आप जैसे पढ़े लिखे को संकुचित होने की ज़रूरत नही। बस आप बोलिये और सबसे अच्छा आप ही बोलेंगे। इन कॉरपोरेट के छिछोरों के सामने आपको लज्जिज होने की ज़रूरत नही। ये लोग जानबूझकर इंग्लिश को इन शब्दों के प्रयोग से मुश्किल बनाते है। जिनका प्रयोग खुद अपने आप मे गलत है। नीचे लिखे शब्दो को गौर से पढ़िए। फिर किसी भी शब्द पर क्लिक कर दीजिए। सारा झोल खुलकर सामने आ जायेगा। 

1. Literally
2. Irony
3. Irregardless
4. Enormity
5. Disinterested
6. Frustrating
7. Diligence
8. Alas
9. Imperial
10. Kudos
 और बहुत सारे शब्दो का आम बोलचाल में चालान वो लोग लाते है जिनका लक्ष्य सीधी बात ना करके अपनी काबिलियत दिखाना होता है। हालांकि ये शब्द गलत नही  मगर इनको इनके परिवेश में ही प्रयोग करना चाहिए। यदि आप शिक्षित है तो जाहिर है कि आपके पास कुछ शब्द अपने विषय से सम्बंधित होंगे ही मगर ध्यान रखे कि आपकी काबिलयत इसी में है कि आप अपनी बात को सीधे साढ़े तरीके से समझ काने वाली भाषा कितना सरल करके बता पाते है।

Comments

Popular posts from this blog

कहीं कोई गलतफहमी में ना रह जाये

 धर्म का प्रयोग देह की तृप्ति के लिये होना कोई नई बात नहीं। कोई ना कोई या तो इस पागल पन में सम्मिलित है या इससे प्रताड़ित है। लगभग सभी सम्प्रदाय इस प्रयोग में सफल हो चुके हैं। ईसाइयो ने बाईबल को पूर्णतः त्यागकर प्रोटस्टेंट की आड़ में ईसाइयत से पूरी तरह निकलकर भौतिकवादी सामाजिक संरचना का अविष्कार कर उसको जीवन प्रणाली बना ही लिया। अब एक ठोस प्रेरणा स्त्रोत के के रूप में डॉलर आधारित व्यवस्था है। गगनचुंबी इमारतों से भरे महानगर। वो बेंचने के लिए आतुर एक ऐसी चमक धमक भारी व्यवस्था का निर्माण कर चुके जिसमें शिक्षा, स्वास्थ, सैन्य उपकरण, सेनाएं, तकनीकी, संचार, पानी, खाना यहां तक कि जीवन और मृत्यु सब कुछ व्यवसाय के रूप में बिक रहा है। धर्म को पूर्णतः त्यागकर जिस पथ पर पूरी ईसाई दुनिया चल रही है उसमें फिर भी दबी कुचली मानवता के लिये कहीं कोई रास्ता निकल जाता है भले ही उसके बदले दुनिया के किसी एक या एक से अधिक हिस्सों को युद्ध क्षेत्र बनकर इस चमक धमक चुकानी पडती हो। अगर गैर ईसाई इलाक़ों में ना सही तो वो अपबे ही किसी ईसाई टुकड़े पर (जैसे यूक्रेन) बम बरसाकर ही अपनी गगनचुंबी इमारतों की भव्यता को यथाव...

ज़िन्दगी का गणित (Anti Depression Post)

तुम खुद को समझते क्या हो ? क्या तुम्हें हिसाब किताब के लिए बनाया गया है या हिसाब किताब को तुम्हारे लिए। तुम कोई भी घटना घटित ही नहीं होने दे रहे। तुम्हारा दिमाग में कुछ भी होन...

कृष्ण की बात कब समझ आती है

एक दिन में गीता अध्ययन कर रहा था। मेरे मन में पूछा,"क्या कृष्ण को जाना जा सकता है ? कोई माध्यम कोई अनुसन्धान क्या मुझे कृष्ण तक ले जा सकता है?" कृष्ण को जानने के सारे प्रयत्न विफल प्रतीत हुए तो मैने इस बात को समझ लिया कि कृषणजाने नहीं जा सकते। कृष्ण जानने का विषय नहीं हो सकते। अंतरात्मा से नई सोच का उदगम हुआ। मन ने कहा "कृष्ण को पाया जा सकता है जाना नही जा सकता " क्या कृष्ण राधा के कृष्ण है जो प्रेम की उत्कृष्ट गाथा को बुनते दिखाई पड़ते हैं या चमत्कारी कृष्ण जो राक्षसों का नाश कर देते है या वो कृष्ण जो अर्जुन के माध्यम से पूरे संसार को गीता जैसा अद्भुत ज्ञान देते है।  अक्सर पढ़ने वाले समझ बैठते हैं कि गीता को पढ़ लेने से उन्हें कृष्ण की अनुभूति हो जाती है।  जिस ने गीता पढ़ी है वो कुछ बिंदुओं पर ध्यान दें 1. गीता मनुष्य को अपने, अपने जीवन,अपनी आत्मा, सम्बंध, पूरे जीवन चक्र के हर बिन्दु के अनसुलझे प्रश्नों का पूर्ण हल देती है। 2. मनुष्य के सामने जीवन का सबसे बड़ा प्रश्नः परमात्मा से उसके सम्बन्ध का है जिसे गीता में कृष्ण बहुत ही आसानी से हल करते हैं। जब अर्जुन ...