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पहला इम्तिहान

1. वो शख्श दुनिया की तमाम उन किताबों को पढ़ता नहीं पढ़ाता है जिन में ज़िन्दगी के कामयाब होने के रास्ते लिखे हैं मगर अंदर से उसका दिल जानता है कि दुनिया का नाकामयाब तरीन शख्श है।
2. ज़िन्दगी का पहला इम्तिहान हारे हुए लोग जिनके दिलों के बीचों बीच एक स्याह नुक्ता है जिसके रिसने वाला ज़हर उनकी पूरी हस्ती को मुसलसल मायूसी और अंधेरो में झोंकता रहता है। पहला इम्तिहान माँ बाप थे जिनकी नाफ़मानी आज एक अजदाह बनकर दिल को लपेटे बैठी है और एक लम्हा ऐसा नही जो ये अजदाह डंक ना मारती हो।
3. दुनियां में जिस हस्ती को ज़बान के सबसे ज़्यादा मिठास की ज़रूरत थी उसी को धमकाया गया, ककड़ कर बोला गया, उसकी तीर की तरह चुभने वाली बाते कही गयी। हर वो काम किया गया जिससे उसके लिए को ठेस पंहुचे। माँ को सबसे ज़्यादा नरमी की ज़रूरत थी और उसके दिल को अपनी नाकामियों की झलें उतारने का मक़ाम बना कर रख दिया गया।
4. बाप की ख्वाहिश थी कि फरमाबरदार बेटा होता तो पचपन से जैसे नशा हो हर उस काम कल करने का जिसको ना करने का बाप ने हुक्म दिया हो और हर वो काम को ना करना जिसको बाप ने करने के लिए कहा हो। ऐसा लगता है कि ज़िंदगी का पहला हिस्सा बाप को मायूस करने में ही निकल गया। वो नसीहत करता करता थक गया और बेटा उस दिन तक उसकी नसीहत को पैरों तले कुचलता रहा जिस दिन तक वो खामोश नहीं हो गया।  उसकी बनाई हुई इज़्ज़त को सारे जहां में तार तार करके भी चैन नही मिली बल्कि बाप की ढलती हुई उम्र में उसको बेइज़्ज़त करने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। 
5. ये दिलो में लगी आग, मायूसी, रोना, लाचारी, ग़मज़दा रातें, नाकाम ज़िन्दगी का बोझ, ना गीता ना क़ुरान कोई इस दिल को रौशन नहीं कर पाता क्या करें कि अंधेरा ही इतना है। ये अंधेरा यूं ही नही आ गया खुद पैदा किया हुआ है।
6. जो लोग अपनी ज़िंदगी की पहले इम्तिहान यानी माँ बाप के मामले में फेल हो जाते है उनकी ज़िंदगी एक तकलीफदेह कहानी बन कर रह जाती है।

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