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Counseling Program for higher education by Nadeem Sir

एडुकेशन के ज़रिए इंसानों के लिए बेहतर ज़िन्दगी की उम्मीद को अपना मिशन बनाकर मैने जो काम शुरू किया था वो अब फैलने की तरफ है। अब लोग सुनने भी लगे हैं और समझने भी लगे हैं। हालांकि शिक्षा पर काम बहुत ज़्यादा हो रहा है। पहले के मुकाबले अब बहुत ज़्यादा लोग पढ़ लिख रहे हैं। मगर जब आप देहात के इलाक़ो में जाएंगे तो आप देखेंगे कि अभी भी बहुत सारे बच्चे या तो स्कूल नहीं जाते या थोडा बहुत पढ़कर छोड़ देते है। शिक्षा का जो मक़सद है कि इंसान को ज़्यादा समझदार, ज़्यादा सभ्य और ज़्यादा अनुशाषित बनाना वो काम तो हो ही नही पा रहा साथ साथ एजुकेशन की हासिल की जा रही है तो संस्कारों की तिलांजलि देकर। देखा जाए तो रुपये कमाने और अपनों से बदबू आने से ज़्यादा कोई और परिणाम शिक्षा का नही निकल पा रहा है। सरकारी नॉकरी हो या प्राइवेट बस शक्षित व्यक्ति ज़्यादा चालाकी से रुपये कमा पॉय रहा है और कुछ नहीं। इसी बात को ध्यान में रखकर मैने जो मिशन अपने हाथों में उठाया है वो यही है कि शिक्षा हो और वो भी असल मगर संस्कार पहले। मेरी निगाहों में जो शिक्षित व्यक्ति की कल्पना है वो वही है जो समाज के उत्थान के लिए जान लड़ा देने वाला बने। उसके लिए अपने स्टूडेंट को सबसे ऊंचे शिक्षा संस्थान तक संस्कार सहित ले जाना मेरा मिशन हैं।
धँसरी, जानसठ, मुज़फ्फरनगर

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