में इस बात का घोर समर्थक हूँ कि भारत को किसी प्रकार के अनुसंधान की कोई आवश्यकता नही। यहां सब कुछ है। जितनी ज़रूरत थी उतना कर लिया गया था। गोबर के उपलों के अलावा भारत की एक मात्र खोज चारपाई है। मनोरंजन के रोज़मर्रा के उपलब्ध साधनों में एक है लड़ाई।
उत्तर प्रदेश में मोहल्लों की लड़ाइयां पूरे मुहल्ले के लिए अति रुचि का विषय होता है उनके दो पार्टियों को छोड़कर जो लड़ रहे होते है।
इन लड़ाइयों का केंद्र बिंदु नालियां होती है या परचून की दुकान पर बकवास झाड़ते हुए एक को दूसरे की बात बुरी लग जाना।
हिन्दू उच्च जातीय वर्ग चूंकि रहने के मामले में सभ्य है इसलिए ये मनोरंजक अवसर उनके बच्चों के नसीब में नहीं आ पाते। इस मामले में हिन्दू निम्न जातियाँ भी किसी हद तक रहना सहना सीख चुकी है। इसलिए भारत मे ये सांस्कृतिक धरोहर सिर्फ मुसलमानों ने सहेज कर रख रखी है
गली मोहल्लों की लड़ाइयां एक सतत प्रक्रिया है जो किसी ना किसी जगह चलती ही रहती है। इन लड़ाइयों में गाली गलौच और मार पिटाई से भीड़ का मनोरंजन किया जाता है।
इनके निम्न कारण होते है।
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