भारत मे जाति का इतिहास पुराना है। यहाँ की जाति व्यवस्था का इतिहास उससे भी पुराना है जितना खुद भारत का इतिहास। जाति व्यवस्था के आरम्भ से अस्तित्व तक पंहुचने का विषय जटिल तो है ही, इतने पुराने ऐतिहासिक स्त्रोतों का ना होना उसे लगभग असंभव बना देता है। अंग्रेजों का भारत मे आना इस व्यवस्था पर चोट थी और हज़ारों साल से दबे कुचले लोगों के लिए स्वतंत्र नायक थे अंग्रेज। अंग्रेजो के आने का नतीजा ये हुआ कि अब ये व्यवस्था मजबूरी में ही सही मगर दिमागों तक सीमित है और आम धरातल पर दम तोड़ रही है। वजह है जिनको शुद्र कहा जाता था अब वो जाग गए। अब वो अफसर भी है, राजनीतिज्ञ भी और कारोबारी भी। अब भविष्य में तो इन लोगों को दोबारा शुद्र बनाना लगभग असंभव है। मगर एक दूसरा सम्प्रदाय है जो शुद्र बनने को आतुर है उस दौर में जब उसे कोई शुद्र नही बनाना चाहता। इस देश मे मुसलमान जिस तरह की आत्मघाती ज़िन्दगी गुज़ार रहा है इसमे कोई संदेह नही कि ये शुद्र हो गया है। पहले शुद्र किस तरह बने ये पता नही मगर इस बार के शुद्र यानी मुसलमान स्वेच्छा से शुद्र बन रहे है। जीवन यानी समय और बुद्धि को जिस तरह मुसलमान क़ौम अपने पैरों तले रौंदती है उसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं। दुनियां के तमाम मुल्क एक दूसरे के ऊपर ज़ुल्म करने का इतिहास रखते है। चीन जंगली और पालतू पशुओं पर जुल्म करने की प्रवृत्ति रखता है। भारत का मुसलमान एक ऐसी कौ। है जो खुद पर जुल्म करने पर तुली है। इनके पास हिन्दू जैसा कोमल दिल पडौसी होने के बावजूद ये समाज मे लगातार पिछड़ रहे हैं। कमियां किस में नही होती मगर ऐसा भी क्या की बेहिसी में आप अपने बच्चों की हत्या और खुदकुशी करने पर आमादा हो जाएंगे। अब के मुसलमान भारत को हज़ारों साल के लिए नए शुद्र दे जाएंगे यानी अपनी आगे आने वाली नस्लें। अबकी बार इतिहास गवाह रहेगा कि किसी ब्राह्मण ने कोई शुद्र नहीं बनाया। अब से एक हज़ार साल बार भी कोई रिज़वान या गुलफाम गटर साफ कर रहा होगा तो उसके उस हाल के ज़िम्मेदार 2020 के मुसलमान होंगे। वक़्त है अभी तो ........
......…..............संभल जाओ। संभलकर जीना शुरू कर दो।
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