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मुँह के बीड़ी जलाता हुआ हाजी लल्लू ठेकेदार अपने गंजे सिर पर हाथ फेरता चला आ रहा था। प्रोफेसर मित्तल को देखकर रुक गया, फिर मूछें मोड़ते हुए बोला, " और प्रोफेसर साब क्या हाल हैं ??"। प्रोफेसर मित्तल ने जवाब दिया," ठीक है भाई तुम बताओ कैसे हो? कहाँ से आ रहे हो?"। तभी दिल्लू (दिलनवाज़ ठेकेदार, सट्टे का अड्डा चलाने वाला) भी हाजी लल्लू को देखकर रुक गया और दोस्ताना अंदाज़ में बड़े खुशमिजाजी से लल्लू से हाल चाल पूछने लगा,"और बे भो..... के कहाँ ........रहा है आजकल।" इसी प्यार के लहजे में लल्लू और दिल्लू की बातें आगे बढ़ती चली गयी। प्रोफेसर मित्तल वहीं खड़े रहे और फिर वहां से निकलने के लिए मुड़े और चल दिये। मुड़ते मुड़ते उनके कान में लल्लू ठेकेदार की एक बात सुनाई पड़ी। "अबे मिझे तो अमेरिका की सरकार चिपटरी नागरिकता देने कु, पर भाई अपना घर ना छोड़ा जावे, मेरे सट्टे के काम की तरक़्क़ी देखकर हारवर्ड यूनिवर्सिटी अवार्ड देवे"। मित्तल जी के कान खड़े हो गए। और चोंक उठे। "अमेरिका की सरकार ????" प्रोफेसर मित्तल को इस बात का अचम्भा नही था कि लल्लू ने इतनी बड़ी ढींग क्यों ह...

बच्चों का पोस्ट पेरेंट्स के पढ़ने के लिए

मेहनत एक अमल है। जिस तरह दुनियां मेहनत का एक नतीजा मुक़र्रर है। नतीजा इस बात पर निर्भर नहीं करता कि मेहनत कितनी की गई है। बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि किस दिशा में की गई है। आपकी मेहनत का नतीजा आपके फेवर में भी जा सकता है और आपके खिलाफ भी। दुनियां में एक मेहनत जो सबसे लंबी है उसे हर इंसान करता है बल्कि कहा जाए कि ज़िन्दगी में मेहनत ही एक करता है औऱ वो है बच्चों को पालने की मेहनत। मगर लाखों में एक ही आदमी होता है जिसकी ये मेहनत रंग लाती है। वर्ना लोग आपको इसी अफसोस में रोते बिलखते हुए अफसोस से भरे हुए मिलेंगे की उनके बच्चे उनकी कद्र नही करते जबकि उन्होंने पूरी ज़िंदगी खुद को झुलसा कर उन बच्चों की परवरिश में लगा दी और अब वो बची है शिकायतें और अफसोस। अगर आप अपने बच्चों को इन अफसोस भरे वक़्तों से होकर गुजरता नही देखना चाहते है तो नीचे लिखे इन बिंदुओं पर गौर करें। 1. बच्चों को वक़्त दें आप अगर अपने बच्चों को वक़्त नहीं देंगे तो वो किसी और से वक़्त मांगेंगे। इस बात के ज़्यादा चांस है कि बच्चा आप के अलावा जहां भी गुज़रेगा वहां से वो या नुकसान उठाकर लाएगा या बेकार की बात। क्योंकि आपके चारों तरफ कि...

इंग्लिश के इन वर्ड्स का प्रयोग आपको बेवकूफ बनाने के लिए किया जाता है

इंग्लिश हो या कोई और भाषा आदमी सीखता है अपने रोज़गार, कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए। क़ाबिल आदमी ज़रूरत पड़ने पर अगर इंग्लिश बोलेगा तो उसका स्त्रोत क्या होगा ? सीधी सी बात है वो किताबें जो उसने अपने अकादमिक करियर में पढ़ी होंगी। अगर इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ , आर्ट्स आदि के भारी भरकम कोर्स करने के बाद भी आपको इंग्लिश बोलने के लिए ट्रेनिंग की ज़रूरत पैड रही है तो वजह हैं वो नाक़ाबिल और बकवास लोग जो नाक़ाबिल होते हुए भी थोड़े से छिछोरेपन और इंग्लिश से कुछ शब्दों को निकालकर उनका गलत प्रसंग में इस्तेमाल करते हैं। अब ये बीमारी अपनी जगह बना चुकी है। इसलिए आप घबराइए और डरिये नही। यक़ीन मानिए कॉर्पोरेट की पैदा करदा इस इंग्लिश से आप जैसे पढ़े लिखे को संकुचित होने की ज़रूरत नही। बस आप बोलिये और सबसे अच्छा आप ही बोलेंगे। इन कॉरपोरेट के छिछोरों के सामने आपको लज्जिज होने की ज़रूरत नही। ये लोग जानबूझकर इंग्लिश को इन शब्दों के प्रयोग से मुश्किल बनाते है। जिनका प्रयोग खुद अपने आप मे गलत है। नीचे लिखे शब्दो को गौर से पढ़िए। फिर किसी भी शब्द पर क्लिक कर दीजिए। सारा झोल खुलकर सामने आ जायेगा।  1. Literally 2. Irony 3. I...

वरना ज़िन्दगी वक़्त से पहले खत्म हो जाएगी

/*कहानी है कहानी की तरह पढ़िए। इससे मेसेज लेने की कोशिश करना।*/ 1947 पार्टीशन का वक़्त है। एक मुल्क के दो हिस्से हो रहे है। लोग एक हिस्से से दूसरे में अपनी जानें बचा बचा कर भाग रहे हैं। दंगाइयों की लापरवाहियों से एक ट्रेन ज़िन्दा बच कर आ गयी। वर्ना लौटकर सिर्फ ड्राइवर ही आता है और लाशों से भरी ट्रैन।  जो ट्रैन बच गयी। उसमे लोग खचाखच भरे है। ट्रैन चलने ही वाली थी कि एक प्रग्नेंट औरत बोझभरी चाल से ट्रैन की तरफ चली आ रही थी। लोगों ने बड़ी मुशक़्क़तों से उसे ट्रैन के डिब्बे की छत पर चढ़ा दिया। ट्रैन चली, चिनाब दरिया आने से एक घंटे पहले ही उसने ट्रैन के डब्बे की छत पर ही दो बच्चों को जन्म दिया। एक ज़िन्दा दूसरा मरा हुआ। वो दोनों को अपने सीने से चिमटाए बैठी रही। आस पास की भीड़ उसे कहने लगी कि मरे हुए बच्चे को चिनाब दरिया में फेंक दो। इसका सबसे अच्छा अंतिम संस्कार होगा। उसने रोते हुए कहा कि इसे नौ महीने पेट मे रखा, कुछ देर तो सीने से लगाने दो। लोग नहीं माने और एक बच्चा चिनाब आते ही छीन लिया। जैसे ही ट्रेन चिनाब के ऊपर से गुजरी, उस औरत के लाख चिल्लाने चीखने पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। और बच्चे को चि...

परपीडकों से कैसे बचें ? (Live life, anti depression content)

दुखीराम! परपीड़क कौन होते है ? तुम्हारा प्रश्न बिल्कुल सही है। क्योंकि तुम्हारी हिंदी में तो तुम्हारे मोडल पेपर से की गई पढ़ाई सालों पहले आग लगा ही चुकी है। तो फिर तुम्हे कैस...

ज़िन्दगी का गणित (Anti Depression Post)

तुम खुद को समझते क्या हो ? क्या तुम्हें हिसाब किताब के लिए बनाया गया है या हिसाब किताब को तुम्हारे लिए। तुम कोई भी घटना घटित ही नहीं होने दे रहे। तुम्हारा दिमाग में कुछ भी होन...